Monday, 23 October 2017

बिहार में क्यों बड़ा पर्व माना जाता है छठ..!!


 


ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं |

अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् ||


ये लोक पर्व कहा जाता है. पूर्वांचल और बिहार में अनिवार्य रूप से लोग छठ मनाते हैं. इस दिन सभी लोग अपने घरों में इकट्ठा होते हैं. लालू-राबिड़ी जैसी हस्तियां भी इस त्यौहार को मनाती हैं.
छठ पर्व के बारे में यह धारणा है क‌ि यह मुख्य रूप से ब‌िहारवास‌ियों का पर्व है. इसके पीछे कारण यह है क‌ि इस पर्व की शुरुआत अंगराज कर्ण से माना जाता है. अंग प्रदेश वर्तमान भागलपुर है जो ब‌िहार में स्‍थ‌ित है.
अंग राज कर्ण के विषय में कथा है कि यह पाण्डवों की माता कुंती और सूर्य देव की संतान हैं. कर्ण अपना आराध्य देव सूर्य देव को मानते थे. यह नियम पूर्वक कमर तक पानी में जाकर सूर्य देव की आराधना करता थे और उस समय जरुरतमंदों को दान भी देते था.
माना जाता है कि कार्तिक शुक्ल षष्ठी और सप्तमी के दिन कर्ण सूर्य देव की विशेष पूजा किया करता थे.
अपने राजा की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंग देश के निवासी सूर्य देव की पूजा करने लगे. धीरे-धीरे सूर्य पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र तक हो गया.
प्राचीन काल में इसे बिहार और उत्तर प्रदेश में ही मनाया जाता था. लेकिन आज इस प्रान्त के लोग विश्व में जहां भी रहते हैं वहां इस पर्व को उसी श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं.

ये कहानी भी है प्रचलित -



छठ के बारे में एक और पौराण‍िक कथा ये भी है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और साप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था. प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं.




बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चों के उग्र ग्रह शांत हो जाएं और जिंदगी में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं आए.  इसलिए इस तिथ‍ि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा.

Chhath Puja process:-
We all that this year chhath puja is going to be celebrated on Thursday, 26 October 2017 .
this is mainly 3 day festival , which start from Naha kha, pahla arag, dusra arag and Paran
The very first day starts with bath and eat that marks the beginning of Chhath Puja.
The second day of this festival involves a day long fast or vrat till evening puja or worship. On this day devotees or vrattis do not take food and water until the evening worshipping of Chhathi Maiya. Rasiao is made with puris or chapattis as Prasad which is offered to the Chhathi Maiya during evening worship this day and with the same Prasad, vrattis break their day long fast.
Third day involves preparation for Puja Samagri, Prasad and offerings for Evening Arghya to Sun God. Last and final process is to offer Suryodhaya or Bihaniya Arghya to Sun God. This day the rising sun is worshiped, devotees break their 36-hour long fast and then Prasad is distributes among family and friends.

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